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Hymn No. 2702 | Date: 28-Sep-2003
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साकार करना है तेरे ख्वाबों को, कल को भुलाके निभाना है आज मैं।
साकार करना है तेरे ख्वाबों को, कल को भुलाके निभाना है आज मैं।
झकझोर देना है अपने आपको, सजग होके चलना है जिंदगी की राह मैं।
सब कुछ निभाते हुये, पूर्णता को पाना है श्वासों के रहते।
प्रभु के सुझाये कार्यों को करना है, अथक पुरूषार्थी बनके।
उसके पीछे सब कुछ भुला देना है, सिर्फ यादों मैं उसके रहना है।
जो हुआ न जाने कितने जन्मों मैं, उसे कर दिखाना इस जन्म मैं।
फलों का मोह त्यागते हुये, करते करते सब कुछ अर्पित कर जाना है।
सारे लाग लपेटों से दूर होके, रमते रमते रम जाना है परम पिता मैं।
दूश्वारियाँ कितनी भी आये जिंदगी में, कसूरवार न ठहराना है किसीको।
कल को भुलाके जीना है आज अभी मैं जिंदगी को।


- डॉ.संतोष सिंह