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Hymn No. 2703 | Date: 30-Sep-2003
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न मैं किसी को मानूँ, न ही मैं किसी को जानूँ, तेरे सिवाय बस तुझको ही मांनू।
न मैं किसी को मानूँ, न ही मैं किसी को जानूँ, तेरे सिवाय बस तुझको ही मांनू।
अगर मान किसीको तो तेरा ही जानके मैं सबको सब कुछ मानूं।
घटने वाला घटके ही रहेगा, तेरे ही योग से वो बदलेगा या टलेगा।
जो नियति में है तो क्यों उसका रोना, और जो न है तो क्यों उसको सोंचना।
हर युग मैं हो जब तेरा बनके जीना, तो किस बात का प्रभु किसी से रोना।
अच्छा बुरा तो खेल है कर्मों का, चाहते या न चाहते सबको हैं निभाना।
अपने किये का दोष क्यों औरों को देना, हंसते हुये प्रारब्ध को है जीना।
रोना है तो रोना प्रभु भक्ति के वास्ते, मांगना अगर शक्ति तो प्रभु भक्ति के वास्ते।
जो इतना बीता तो बीत जायेगा, आने वाला कल भी पलक झपकते बीत जायेगा।
आंखो के बंद होने से पहले पहले, प्रभु नाम रस पी लेना ही जिंदगी है।


- डॉ.संतोष सिंह