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Hymn No. 2738 | Date: 10-Nov-2003
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मुलाकात करने चला था मौला से, मुक्का लात हो गयी हालातों से।
मुलाकात करने चला था मौला से, मुक्का लात हो गयी हालातों से।
सोंचा हुआ कभी कर न सका, करने का वादा फिर भी कई बार करता गया।
रंज दिल मैं किसी के लिये न था, दंग हो जाता था किस्मत के आगे।
कब तक चलेगा जीवन का सिलसिला, कब पार पाऊँगा हालातों से।
दास्ताँ जिंदगी की है बड़ी अजीब, जो समय समय पे फेर खावे।
हार हमने भी न है मानी, तेरा साथ मिलते बन गया हूँ जो सानी।
क्या हो रहा है उससे न फर्क पड़ने वाला है जिंदगी मैं, जो ठाना उसको तो है करना।
डर का वजूद धीरे धीरे मिटता जा रहा है, जैसे जैसे कदम तेरी ओर बढ़ा जाऊँ।
बीती को बिसारके, पंख फैलाया हूँ तेरी ओर, रुकना नहीं किसी छोर पे।
प्रयासों को करे साकार तू, अथक के आगे झुक जाये जो सारा संसार।


- डॉ.संतोष सिंह