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Hymn No. 2808 | Date: 03-Jul-2004
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क्या क्या बात करूँ मैं, जब हो तुम मेरे पास, क्या क्या बात करूँ में...
क्या क्या बात करूँ मैं, जब हो तुम मेरे पास, क्या क्या बात करूँ मैं...
आंखो में नमी रहती है, बोले बोल फूटे नहीं क्या क्या बात करूँ मैं...
नुरानी छा जाती है मुखड़े पे, मानों सब कुछ पा जाता हूँ, क्या क्या बात करूँ मैं।
तिरता रहता हूँ गगन मैं, मानो कदम पड़ते नही जमी पे, क्या क्या बात करूँ मैं।
दौर पे दौर चलता है, नशा धीरे धीरे ओर बढ़ता है।
रोके रुक नहीं पाता हूँ, अनायास तेरा हमदम बन जाता हूँ क्या ...
चैन रहता नहीं दिल मैं, सोते जागते ख्वाब देखता हूँ, क्या ...
पल भरके लिये मुक्त हो जाता हूँ, तेरे साथ रहते डूब जाता हूँ तुझमें क्या...
बेफिक्री का आलम ये होता है, जैसे सारी दुनिया है मेरे करम से...
आह निकलती है जो समय को गुजरा हुआ पाऊं, बिछुड़ने से पहले प्राणों को छोड़ देना चाहूं क्या...


- डॉ.संतोष सिंह