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Hymn No. 2740 | Date: 08-Dec-2003
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बर्बाद है, बर्बाद है जिंदगी, प्रभु आबाद करना अपने प्रेम से।
बर्बाद है, बर्बाद है जिंदगी, प्रभु आबाद करना अपने प्रेम से।
खड़ा हूँ कतार में जिदंगी की, प्रभु नवाजना तू अपनी बंदगी से।
अहसास है, अहसास है तेरा प्यार का जीवन के हर पलों मैं।
फिर किसकी तलाश है, जो खत्म नहीं होती हर श्वास से।
दास हूँ, दास हूँ मैं तेरा, चाहे हो दुनिया मैं कोई जन्म,
लगता नहीं, लगता नही दिल कही भी, उचटे पल भर मैं कहीं से,
ये कैसा है मेरा प्रेम, जो तुझपे भी न अटका है वो माथा मैं लटका।
फिर भी मिले उसे सकून तेरे पास आके, रहे चाहे वो कही भी,
याद आते बड़ी जोर से भागे, जैसे कोई बच्चा मैले मैं मां को खोजे।


- डॉ.संतोष सिंह