Hymn No. 2741 | Date: 12-Oct-2003
कैसे बताऊँ, कैसे बताऊँ, प्रभु मुझे प्यार है तुमसे कितना,
कैसे बताऊँ, कैसे बताऊँ, प्रभु मुझे प्यार है तुमसे कितना, मैं तुम्हारा प्रिय भक्त हनुमान नही, जो दिखाऊँ चीर के सीने को। कैसे बताऊँ, कैसे बताऊँ, प्रभु मुझे प्यार है तुझसे कितना, न ही हूँ मैं शबरी, जो मजबूर हो जाये तू श्रध्दा से जूठे बेर खाने को। कैसे बताऊँ, कैसे बताऊँ, प्रभु मुझे प्यार है तुझसे कितना, न ही हूँ मैं भक्त प्रल्हाद, जो हर कण मैं प्रकट करने को विवश करे तुझे। कैसे बताऊँ, कैसे बताऊँ, प्रभु मुझे प्यार है तुझसे कितना। न ही हूँ मैं भक्त सुदामा जैसा सरल, जिसका रूखा सूखा तू ग्रहण करे। कैसे बताऊँ, कैसे बताऊँ, प्रभु मुझे प्यार है तुझसे कितना। न ही हूँ मीरा जैसा प्रेम दिवाना, जो खींचे पल पल साथ साथ रहने को। कैसे बताऊँ, कैसे बताऊं, प्रभु मुझे प्यार है तुझसे कितना। मैं तो हूँ अपने आप मैं अकेला, जो तुझसे सब कुछ पाके लुटाना चाहूँ तुझपे।
- डॉ.संतोष सिंह
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