VIEW HYMN

Hymn No. 2742 | Date: 12-Nov-2003
Text Size
मैं कभी याद करने लायक न था, प्रभु कोई कहे मैं भूल जाऊंगा तुझे।
मैं कभी याद करने लायक न था, प्रभु कोई कहे मैं भूल जाऊंगा तुझे।
मैं तो खुद जाने को हूँ तैयार, न है याद करने जैसा कुछ जिंदगी मैं।
हिकारतों से भरा है हर पन्ना, लज्जास्पद है मेरे जीवन का हर लम्हा।
मरुस्थल भी खुशहाल लगे, जो सुन ले मेरे जीवन मैं के किस्सों को।
अमृत से भरी बूंदो से सींचा था तूने, दिल तो कुम्हलाया था लानतों से।
हमने जो न सोचा वो कराने को तूने ठानी, इस गिरे हुये को उठाने की जो तूने ठानी
जीता था अपने आप मैं लोगो के संग रहके लोगों से दूर रह के।
कब क्या हो जाये, कब क्या खुद कुछ कर जाऊँ, न ही था कोई ठिकाना।
अचानक हुआ जिंदगी मैं तेरा आगमन, कुछ खुशियों के सितारे चमके।
पर न जाने क्यों लुप्त होने का डर है समाया, तेरे रहते जिंदगी को क्यों हूँ गुमाया।


- डॉ.संतोष सिंह