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Hymn No. 2760 | Date: 31-Jan-2004
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गुजरती हुयी जिंदगी मैं, गुजरती हुयी दुनिया में यथावत कुछ है तो मालिक वो तू है वो तू है।
गुजरती हुयी जिंदगी मैं, गुजरती हुयी दुनिया में यथावत कुछ है तो मालिक वो तू है वो तू है।
जो आज हो, वो कल न होगा, ऐसा कुछ भी नही जो न होके हर पल है, तो मालिक तू है, वो तू है।
मसरूफ है दुनिया में हम सभी, तो कोई मजबूर है कर्मों के आगे, इन सबसे परे बस एक तू है, वो तू है।
कितना भी बन ले कोई चलती नहीं किसी की, वख्त का पलड़ा है भारी, उसकी भी चलती नहीं कहीं, वो तू है, वो तू है।
जो प्यार में तेरा होके, हर ओर से तेरा होके गुजारे जिंदगी को, तो मालिक तेरा जागृत स्वरूप वो है, एक वो है।
डिगता नहीं डिगाने पे, अपना पराया कोई नहीं तेरे वास्ते जमाने में, तो मालिक वो तू है, वो तू है।
कहता जो है करता जाये, आये राहों में चाहे कितनी भी कठिनाई, मुस्कराती छवि कौंधे जो दिल में, तो मालिक वो तू है, वो तू है।
ख्वाबों को छोड़ हकीकत में जो उतार लाये, रहते है हर पल अंतर मैं तुझे छुपाये, इंसान के वेश में मालिक वो तू है, वो तू है।


- डॉ.संतोष सिंह