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Hymn No. 2762 | Date: 13-Mar-2004
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रह रहके क्यों रुक जाता हूं, मां तेरे पास आते आते।
रह रहके क्यों रुक जाता हूं, मां तेरे पास आते आते।
ख्वाबों को बुनते बुनते न जाने क्यों रंग भर नही पाता हूँ।
ऐसी कौन सी कमी है, जो अच्छे हालातो को बिगाड़ के रख देते है।
बहुत चाहा न रुकूँ अब की बार, होश में रहते चुका हर बार।
पल पल समय गुजरता जाये, यों ही इंतजार करुँ में किसका।
सद्गुरू के पास पहुँचके, कहा कर न पाया जो में उसका।
समय जाते पछताऊँ बहुत में, चाह चाहके भी बदल न पाऊँ।
ऐसी कौन सी थी कड़ी, जो मेरे कर्मों की बेड़ा तोड़ न पाये।
आस लगाये बैठा हूँ मैं मां तुझसे, करना न निराश तेरे दर से।
मेरा जो जायेगा वो तो जायेगा, पर तोहमत न लगे सद्गुरू पे।


- डॉ.संतोष सिंह