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Hymn No. 2777 | Date: 16-Apr-2004
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बीती को बिसारके जाना है तुझे आगे रे,
बीती को बिसारके जाना है तुझे आगे रे,
बीती से है लेना सीख रे, न कि दुःखों की सौंगात...
आयेगे न जाने कितने पहलू जिंदगी मैं, रोके न रोके कोई रें...
गुजरना है हर एक को इस पहलू से, कोई न भेद करे अपने पराये का।


- डॉ.संतोष सिंह