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Hymn No. 2778 | Date: 16-Apr-2004
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एक बार कहा प्रभु से, कई बार कहा प्रभु से।
एक बार कहा प्रभु से, कई बार कहा प्रभु से।
कहता ही गया प्रभु से, कर न सका कहा प्रभु का।
सुनता ही रहा, सुनता ही गया, मुस्कराके वो मौन रहा।
समझा न सका, समझ न सका, हालात समझाते गये।
बहुत गिड़गिड़या, रोना जीवन का उसे सुनाया, उसी पल हँसाया।
कितनी भी दुहाई दी, सुहाये न जिंदगी के पल, फिर भी वो करता गया।
जो अपना ने न किया, जो सपनो में न सोचा।
मुझको ओर लोगो को निमित्त बनाके, संजोगों की आड़ मैं बदलता गया।
जिसे कोई भी न माने, जिसे कोई भी न जाने।
उसी ने अपनाया, अपना के गले लगाया, न जुदा होने के लिये।
- डॉ.संतोष सिंह
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