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Hymn No. 2787 | Date: 18-May-2004
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मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता।
मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता।
सच पूछो प्रभु जी मुझे नहीं पता, मुझे कुछ नहीं पता, मुझे नहीं पता।
बहुत चाहा, चाहके भी पता कर न सका, मुझे नहीं पता।
लोगो को लगे, मुझे भी लगे, मुझे है सब कुछ पता, मुझे नहीं पता।
सच पूछो न चाहा कभी पता करने तो पता कैसे चले, मुझे नहीं पता।
ठप्पा जो लगा रखा था, सब कुछ पता होने का, मुझे नहीं पता।
बहुत कुछ सुना, सुनके जाना, जानने के बाद करना न आया, मुझे नहीं पता।
पूछा अपनों से परायों से, न जाने कितने दीवानों से, किसी को कुछ भी नहीं पता।
हवा में न जाने कितनी बातें उभरी, फिर भी किस्मत मेरी न सुधरी, मुझे नहीं पता।
जिन्हे था सब कुछ पता, वो थे लाखो में अकेले, फिर भी उन्होंने कुछ न कहा।
तो कैसे में कुछ जानूँ, मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता........।


- डॉ.संतोष सिंह