VIEW HYMN

Hymn No. 2801 | Date: 25-Jun-2004
Text Size
दिया हुआ तेरा हमने लुटा दिया, वख्त के चलते सब कुछ गंवा दिया।
दिया हुआ तेरा हमने लुटा दिया, वख्त के चलते सब कुछ गंवा दिया।
होश में न थे हम कभी, जोश में सब कुछ गुमां दिया।
दुआ तेरी इतनी भी, इश्क करते थे अपनी किस्मत पे मेरी।
दिन हो या रात देखा करते थे, बस प्यार भरे तेरे ही ख्वाब ।
गुमा न था महफूज हो जाऊँगा, अपनी करनी के चलते तुझसे दूर हो जाऊँगा।
दाग था तो पहले से, कर्मों के चलते बदनुमाँ बना दिया।
उफ तक न किया होश रहते, तेरी हालत को बुरा से बुरा बना दिया।
दोष किसी को क्या देना, जो सारी बुराईयों की जड़ था में खुद।
हद् हो गयी जो हद् की, हर सीमा को लांधते सब कुछ गंवा दिया।
अब न है कुछ हाथों मैं, समय को जो हमने लुटा दिया।


- डॉ.संतोष सिंह