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Hymn No. 2800 | Date: 23-Jun-2004
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सलाम, सलाम, सलाम, मालिक तुझे दिल के हर कोने से सलाम।
सलाम, सलाम, सलाम, मालिक तुझे दिल के हर कोने से सलाम।
गुलाम काबिल नहीं तेरे, फिर भी करता है तुझे हर पल सलाम।
पहुँचे नही कभी करीब तेरे सलाम, न आये कभी मेरा ख्याल।
किसी कोने से चुपके चुपके तुझे निहारूंगा, कतराऊँगा तेरी निगाहों से।
जो सिला दिया तेरे प्रेम का, हकदार बनता हूँ दोजख मैं जाने का।
हर श्राप को पाना चाहूँ, मौत के वास्ते पल पल तड़पना चाहूँ।
सिहर जाये, हर पापी का मन, मेरा हाल देखके वे मुक्त हो जाये पापों से।
करुँगा दुआँ खुदा से, कि तू न जान पाये कुछ, क्योंकि तेरे जानते हो जायेगी मेरी पीड़ा।
चैन छीन ले बचा खुचा ऐ मेरे प्रभु, तिल तिलके तड़पूँ तेरी यादों मैं विचरते।
रोम रोम करे मेरा तुझे सलाम, कोई पल न जाये जो न करू तुझे सलाम।


- डॉ.संतोष सिंह