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Hymn No. 2803 | Date: 26-Jun-2004
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ओं मेरे गिरधर गोपाल, तुझे राम कहूँ या श्याम ..
ओं मेरे गिरधर गोपाल, तुझे राम कहूँ या श्याम ..
अंतर मैं उभरे जो तेरा नाम, देखूं चारों ओर तेरा स्वरूप...
चढ़ जाये रंग, जो मन पे तेरा, पल पल रहता है तू संग मेरे ...
कहना होता है मुश्किल, जब तू होता है संग हमारे ...
निकलता है सुर ओर गीत, जब उमड़s प्यार का सैलाब ...
एक अजीब सा नशा रहता है, दिल यो ही खुश खुश होता है .
कह लो चाहे तुम कुछ भी, न जाने कैसा सरूर जो छाया रहता है...
बानगी न है ये मेरी कुछ भी, ये तो मिटने की तैयारी है...
दास सदियों से हुँ तेरा, हिमाकत करता है प्यार बनने की ...
जान ले लोगे तो भी न छोडूंगा, चैन जो ना है अब दुनिया में...


- डॉ.संतोष सिंह