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Hymn No. 2804 | Date: 01-Jul-2004
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तार दे यार मार दे, जिंदगी है अब तेरे सहारे, जो चाहे वो हाल कर दे।
तार दे यार मार दे, जिंदगी है अब तेरे सहारे, जो चाहे वो हाल कर दे।
कसक दे दिल में, जो अंजाम दे कर न सका ख्वाबों को तेरे अब जो चाहे वो तू हाल कर दे।
डूबा रहता हूँ यादों मैं, चाहे दिन हो या रात, मेरे प्यार को तू अब अंजाम दे।
ख्वाबों से भरी जिंदगी है, जिसमैं हम सच्चाई से कोसों दूर हैं, अब तू जो चाहे वो हाल कर दे।
कर न सके, न करनेका गम है, झूठ या सच पता नहीं, पर गम तो है दिल मैं जरूर।
टूट गये हालातों के आगे, अपनों को छोड़ो छोड़ा साथ साये ने, मन को अब तू विराम दे।
बातों से बदलती नही जिंदगी, ठोकर खाया हूँ जमाने की, सारे कसक को अब तू विराम दे।
प्रयास बंद न हुआ है, रुकने का जरूर अहसास है, अथक से भरा तू हमको सामान दे।


- डॉ.संतोष सिंह