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Hymn No. 2832 | Date: 19-Sep-2004
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मैं चला था बिना सोचे समझे, कभी ये न जाना होगी मुलाकात तुझसे।
मैं चला था बिना सोचे समझे, कभी ये न जाना होगी मुलाकात तुझसे।
जीता था जिंदगी को यों ही, बदलाव आ गया मिलते ही तुझसे।
जो कर न सके वो करते चले गये, जिंदगी को जिंदादिली से जीने लगे।
मिटने लगा मन ओर दिल का भेद, धीरे धीरे श्वासों मैं समाया प्यार उनका।
बात बनने लगी, न जाने किस जन्म का ख्वाब साकार जो होने लगा।
फेर है तो बस नजरों का, ऊपर उठा जो तन से तो हम एक है ओर है।
लागी रहे ये लगन ताउम्र जीवन में, क्या लूभायेगी ये दुनिया अब हमको।
सहारा था सदा एक तेरा, कहर से भरे दिनों में कृपा थी तेरी।
अब न छोड़ना फिर भी श्वासों के न रहने पे तू रहना सदा हमारा।
गुजरे चाहे किसी भी हाल से, हर हालत में तिरता रहू आनंद में।


- डॉ.संतोष सिंह