VIEW HYMN

Hymn No. 2842 | Date: 14-Oct-2004
Text Size
सिलसिला अनवरत तू चलाये रख माँ प्रेम का, देखते देखते डूब जायेगे हम।
सिलसिला अनवरत तू चलाये रख माँ प्रेम का, देखते देखते डूब जायेगे हम।
अभी मन का जो रोना है, शरीर से जो लगाव है टूट जायेगा वख्त रहते तेरी कृपा से।
लम्हें का क्या उनको तो गुजरना है, पर जिंदगी में तेरे प्यार को पाना है।
जारी रख तेरे प्रेम में खामियों को छोड़ कर दिखाना, तेरे पास सदा के वास्ते जो जाना है।
अर्पण करने को न है कुछ, फिर भी समर्पित कर देने की खुद को चाहत है।
ताकत आज है, कल नहीं, न ही बंधना है तन की ताकत में, तेरे वास्ते ही बस जीना है।
पड़ी नहीं है अपनी, न ही लाचारगी किसी बात की, फिर भी हर हालातों से उबरके तेरे पास आना है।
खेल है अजब माया का, जो भोगें भोग पाया, पीछा छुड़ाके तेरा बनके जीना है।
दासता की हर कड़ी को तोड़ना है, भक्ति और सेवा के दासत्व को स्वीकार कर तेरा हो जाना है।
अभी नहीं तो कभी नहीं इसी तरह से करते चले जाना है, हर हमेशा के वास्ते तेरा हो जाना है।


- डॉ.संतोष सिंह