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Hymn No. 2908 | Date: 04-Dec-2004
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तेरा मतवालापन देखके झूम जाये दिल, जो तेरे पास पहुँचते मस्ती मैं चूर हो जाता हूँ।
तेरा मतवालापन देखके झूम जाये दिल, जो तेरे पास पहुँचते मस्ती मैं चूर हो जाता हूँ।
तेरी याद आते गुम हो जाता हूँ, जैसे सचमुच तेरे पास पहुँच जाता हूँ।
कहना है मुश्किल क्या से क्या होता है दिलमें बिना किसी वजह से प्यार पाता हूँ तुझसे।
मन की मिट जाती है सारी व्यथा रहती नही कोई कथा, बस यो ही देखते जाऊँ तुझको।
मय्यसर न है मेरी जिंदगी में, मिलती है तेरी कृपा से, सुख दुःख में आनंद आता है।
बेकरार रहता हूँ इतना हर पल नजरें तुझको ही खोजे, सुन न पाके सुनने को बेताब रहता हूँ तुझसे।
हम कर्मों को मारे हुये को, जन्मों से भटके हुये को चैन पाते हैं तेरे पास पहुँच के।
याद आती है तेरी बातें, तेरे गीत और न खत्म होने वाले किस्से
बेताब हो जाता हूँ एक बार तेरे पास पहुँचने को तेरा हो जाने को।


- डॉ.संतोष सिंह