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Hymn No. 2921 | Date: 18-Jan-2005
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मेरी हर श्वास का जो तू हिस्सा न है, तो कोई मतलब नहीं मेरी जिंदगी का।
मेरी हर श्वास का जो तू हिस्सा न है, तो कोई मतलब नहीं मेरी जिंदगी का।
तेरे प्यार को पाके जो न बदला तो खेल चलता रहेगा जनम ने मरने का।
तेरे बताये हुये पथ पे चलते जो न पहुँचा तेरे पास तो खेलेंगे कर्म मेरे साथ
मेरी जिंदगी ने जो न पाया अंजाम तेरे प्यार का, तो दर्द से रोयेगी मेरी अंन्तर्आत्मा।
मैं अगर किसी कारण से कर न सका कहा तेरा तो तड़पूंगा तीनों लोक मैं रहते कहीं
मुझे नही पता मेरा वजूद है क्या, पर मैं पल पल टिका हूँ बस तूझमें।
मेरे पास न ऐसा कुछ भी है जो रीझ जाये तू मुझपे है बस एक तेरी सुहानी याद।
मुझे सब कुछ मिल जाये तो क्या, मेरा सब कुछ लुट जाये तो क्या चैन पाऊँ पहुँचके तेरे पास।
मेरी बेपरवाही का अंजाम क्या होगा, पर इतना जरूर है निकलेगा फरमान तेरे पास से।
मेरी कथा से निकल जायेगा जो तू, तो भटकूंगा तेरे वास्ते अनंत की राह पे।


- डॉ.संतोष सिंह