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Hymn No. 2923 | Date: 21-Jan-2005
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एक तड़प है, एक तड़प है सदा से मेरे अंतर की, मौत हो या जीवन पल पल तड़पता हूँ उस तड़प के वास्ते।
एक तड़प है, एक तड़प है सदा से मेरे अंतर की, मौत हो या जीवन पल पल तड़पता हूँ उस तड़प के वास्ते।
होता हूँ उदास पर हंसता हूँ दिन रात, ऐ कैसी तड़प है जो पूरी ना हुयी आज तक कितनी सच्ची तड़प है मेरी।
आती है याद तेरी हर दुसरे चेहरे को देखते, किसी न किसी अंदाज मैं जो रखते हैं तेरी अदा को बरकरार अनजाने मैं।
हंसी आती है मुझे पल पल अपने आप पे, जो देता हूँ तेरा नाम, फिर भी पलभर के वास्ते पाऊँ न पास अपने।
चलता चला जा रहा हूँ मुस्कराके तेरे गीतों को गाते, कि जहाँ भी जाऊँगा मैं न पहुँच पाऊँगा।
तो भी तुझे पास अपने पाऊंगा।
मायने न है मेरे होने का, मायने न है मेरे करने का, मायने तो है जो तूने रखा है पास अपने बड़ी शिद्दत से।
अब न हूँ हैरान, न हूँ किसीको देखके परेशान किसी की करनी को, मैं होता तो उससे भी ज्यादा गया गुजरा होता।
चलता चला हूँ तेरी राह, बिना जाने न समझे, होगा जो भी मेरा हाल करुँगा धन्यवाद तेरा कि धन्यभाग हूँ जो तूने रखा साथ।
एक ओर मौत होगी, एक और जन्म होगा, किसी भी खुशी ओर दुःख से परे हर हालातों में पल पल तेरा साथ होगा।
मुक्ति के कोई ओर गीत गाये, हम तो तरसे बस तेरी सेवा को, वही मायने है बस हमारी जिंदगी का।


- डॉ.संतोष सिंह