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Hymn No. 2924 | Date: 30-Jan-2005
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तराना बनना कोई तुमसे सीखे, अफसाना बनाना कोई तुमसे जाने।
तराना बनना कोई तुमसे सीखे, अफसाना बनाना कोई तुमसे जाने।
एक ही पल में यहां वहां सारे जहाँ में न जाने कहां कहां तुम होते हो।
सच झूठ से परे सचमुच का सत्यमय होके जीवन को जीते हो तुम।
कोई आये कोई जाये लुटाते हो प्यार, जैसे रिश्ता है न जाने कितने जन्मों का।
एक बार में न जाने कितना कुछ दे देते हो, फिर भी न कुछ जताते हो।
दर्द चुपचाप पीना कोई तुमसे सीखे, यों ही प्यार लूटाना कोई तुमसे जाने।
कम पड़ जाये मेरी जुबानी, फिर भी लिखी न जाये तेरी दया की कहानी।
पल पल बीतते जीवन में कुछ स्थिर तो प्रियतम् बस एक तेरी मेहरबानी।
मेहरबान है एक तू सदा से कदर करना चाहे हम जाने या न जाने।
तिलस्मी दुनिया में कोई है एक अपना, तो बस वो तू है, तू है सदा से।


- डॉ.संतोष सिंह