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Hymn No. 2925 | Date: 04-Feb-2005
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तुम अगर छोड़ दोगे तो न कोई स्वीकारेगा,
तुम अगर छोड़ दोगे तो न कोई स्वीकारेगा,
तुम्हारे छोड़े हुये को जमाना ठूकरायेगा।

फिर भी दिल प्यार के गीतों को गायेगा,

इस बेनाम रिश्ते को जी जान से निभायेगा।
मसरूफ रहोगे तुम अपने आप मैं, खोये रहेगे हम ख्यालों मैं,
चुपचाप एक ही धुन मैं जिंदगी जीते जाऊंगा।

उल्फत के अंजाम को प्यार से निभाऊंगा,

दास्तां जो भी हो किस्मत की मुस्कराके स्वीकारूंगा।
पस्त हौंसले होंगे तो भी हंसते हुये तेरे पास आऊंगा।
प्यार की मिसाल कायम करते जाऊंगा।

हारूंगा फिर भी जीतने के अंदाज को पाऊँगा।

तुझसे दूर रहते हुये तुझे अपना बनाके दिखाऊँगा।
सौदागर नहीं में प्यार का, फिर भी नगमें गाऊंगा,
तेरे राह के हर कांटो को अपने जिस्म पे चस्पाऊंगा।

तेरी गिले शिकवे दूर करने मैं जीवन लगाऊंगा,

जो मेरे हाथों में न है वो तेरी कृपा से कर पाऊंगा।
किसी कोने से ताउम्र चुपके चुपके तुझे निहारूंगा,
अपनी हसरतों को सीने में दफन करके मर जाऊंगा।


- डॉ.संतोष सिंह