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Hymn No. 2926 | Date: 04-Feb-2005
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लुट हुये को लूटेगा तो तू क्या पायेगा,
लुट हुये को लूटेगा तो तू क्या पायेगा,
बदनाम के हिस्से एक ओर बद् जुड़ा तो क्या जायेगा।
अनकहे न जाने कितने पुराने किस्सों को दोहराऊँगा,
तेरे दिल मैं कैसे चैन होगा, जो तड़पेगा दिल तेरे वास्ते।
माना लाखो मिल जायेगे मुझ जैसे पर न होंगे हम,
हमारे न होने से तेरा कुछ न जायेगा, फिर भी याद तो आऊंगा।
पर कोई रूह हर पल छटपटाये तेरे वास्ते तो कैसे चैन पायेगा तू
मुझसे जुदा होके तू किसी लोक मैं जाके कैसे रह पायेगा।
माना बनाया हुआ हूँ तेरा पुतला, पर तेरी सत्ता समायी है,
तेरी कृपा हो या तेरी रजा तुझसे अलग न रह पाऊंगा।


- डॉ.संतोष सिंह