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Hymn No. 2927 | Date: 05-Feb-2005
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ये बानगी है कैसी प्यार की, एक तरफ प्यार है तो एक तरफ संसार है।
ये बानगी है कैसी प्यार की, एक तरफ प्यार है तो एक तरफ संसार है।
साथ साथ चलता है, एक के पास कदम बढ़ाये तो दूजे के लिये दिल रोता है।
मन मसोस - मसोस के रह जाता हूँ, जब राम के पास पहुँच नहीं पाता हूँ।
जद्दोजहद ये आज की न है न जाने कब से है संसार की, हर बार जो जीता है।
चैन नहीं हमारे दिल को, करे बार बार जीवन में हर प्रयासों को।
एक असीम प्रकाशमय है तो दूजा धोर अंधकार, पर रहते हैं साथ साथ दोनों ही।
एक हमारा शाश्वत् अंतर है तो दूजा बाहरी दुनिया मैं टिका हूआँ मन माने कल है।
लुभायें जो पल पल हमको, रह न पाये उसके बिना हर पल हम भी न कभी।
चलती जाये जिंदगी न जाने कब किस पल किसका बनके रहते है हम दुनिया में।
रहनुमाँ तो बस एक तू है, तेरी ही चाहत है सदा से, न दूर कर तू अपने से।


- डॉ.संतोष सिंह