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Hymn No. 2928 | Date: 17-Feb-2005
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तेरे सिवाय कौन है मेरा जो करे बेड़ पार, करता हूँ मैं तेरा रात दिन इंतजार।
तेरे सिवाय कौन है मेरा जो करे बेड़ पार, करता हूँ मैं तेरा रात दिन इंतजार।
पल के बाद पल आये न जाने कितना वख्त गुजर जाये कब तक करायेगा तू झुंजार।
प्यार है न जाने कितना जितनी पीता जाऊँ, उतना ही खुद को प्यासा पाऊँ।
क्यों करे तू मेरे गुहार को अनसुनी, वो कौन से कर्म थे जो करें मजबूर।
कब तक खेलेगी खेल माय मुझसे, खुली आँखो के रहते कब तक जाऊँगा सूरदास बनके।
मन विकल होवे बार बार, प्रिय माना बहुत नहीं फिर भी न कराओ अब इंतजार।
बहुत कुछ लुटा दिया तेरे रहते, जो तेरा न हुआ तो क्या पाया इस जीवन से।
धंर्य धीमैं धीमैं खत्म हो जाये, अंतर मैं तुझे लेके न जाने कितने भाव उमड़ घुमड़े।
दिल को न तोड़े, न ही अकेला छोड़ो, सब्र का बांध टूटे उससे पहले खुद से जोड़ लो।
तेरा चाहा ही बस करना है, तेरा होके बस रहना है, जीवन तेरा बनके ही जीना है।


- डॉ.संतोष सिंह