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Hymn No. 2929 | Date: 05-Feb-2005
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ओ शाश्वत पिता आके बस जाओं अब तुम हमारे दिलों मैं ओ शाश्वत पिता...
ओ शाश्वत पिता आके बस जाओं अब तुम हमारे दिलों मैं ओ शाश्वत पिता...
बसते हो तुम तो सारे जहां मैं, आके बस जाओं अब तुम हमारे दिलों मैं, ओ शाश्..
देर हो रही है अब, घबड़ाये मन मोरा पल पल समझ न आये कुछ, ओ......
भटका तेरी तलाश मैं न जाने कितनी बार कहां से कहां तक नाम न ले खेल खत्म होने का।
मिलके बिछुड़ना होता रहा कई कई बार, फिर भी मिलने न आया सदा के वास्ते एक बार ओ...
कब अंत होगा मेरी तड़प का, जो तड़पाये रात दिन, पल पल तेरी याद दिलाये, ओ...
माना करनी है मेरी तो भरनी होगी, पर भरने मैं तुझसे दूर होता क्यों चला जाउँ ओ...
क्या मेरी प्रेम कहानी का अंत यही हे, तुम्हारे रहते मुझे बिछुड़ना होगा तुमसे, ओ...
इस झूठ के पुलिदे मैं कहीं सच तो होगा जरूर, जो भुला न पाये दिलके दर्द को ओ...
बहुत चाहा भूल जाना, रमते रम जाना तेरी दुनिया में, पल भर मैं खीचा तेरी ओर चला आया ओ...


- डॉ.संतोष सिंह