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Hymn No. 2993 | Date: 02-Aug-2005
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पाओगे वही, जो करोगे जैसा, कहाँ से देगा देनेवाला जो दुखाओगे तुम किसीके दिल को।
पाओगे वही, जो करोगे जैसा, कहाँ से देगा देनेवाला जो दुखाओगे तुम किसीके दिल को।
बदल जायेगा दिन रात बदल जायेगा संसार, जो तुम सीख न पाओगे तो रोओगे रोना जिंदगी का।
दूसरों को समझाने में जो रहे, तो खुद कैसे समझ पाओगे, बस हालातों के आगे बिखरते जाओंगे।
समय का क्या उसे तो है बीतना, जिंदगी को भी तो है गुजरना, पर जो तुम न होश में आये तो यों ही चले जाओगे।
न जाने कैसे कहाँ से हो आये, प्रभु ने कृपा कितनी बरसायी, प्रेम गीता को जो न गाया तो जिंदगी व्यर्थ जायेगी।
फितरत का न कोई लेना देना नही कुदरत से, वो तो कर्मों का है जलजला, तुम्हारी गुहार लगाना तो है उसको कृपा बरसाना।
भिगोना है तो भिगोवो रोम रोम को उसकी कृपा में, न कि मन के मनमाने कर्मों से, जो न है मिला वो भी मिलेंगा उसकी दया से।
देने को तो देता रहा है, पाने के बाद भी रोना रोते रहे है, इस जाल से निकल के तुम सच्चे दिल से उसे अपनाओ।
जीवन हंसीन है सदा से, जिसने एक बार को जाना, फिर उसे न रोक सका ये सारा जमाना।
होम हो जायेगी मन की सारी कठिनाई, जो एक दिल जुड़ जाये परम् पिता से तो न रहेगी कोई दूरियाँ।


- डॉ.संतोष सिंह