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Hymn No. 2992 | Date: 02-Aug-2005
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अनवरत अनवरत तेरी कृपा चाहूँ, तेरे पास रहके तेरा प्यार चाहूँ।
अनवरत अनवरत तेरी कृपा चाहूँ, तेरे पास रहके तेरा प्यार चाहूँ।
मत पूछो मौला मैने क्या किया, मेरे पास न है तेरे नाम के सिवाय कुछ।
मरना पड़ा तो मरूंगा हंसते हंसते, पर ओठों पे तेरा नाम चाहूँ।
हंसते हंसते आया था तेरे पास, हंसते हंसते खो जाऊँ बनके तेरी याद।
मेरे तुच्छ प्यार के सिला मैं तू अपनी बेइंतहाँ खूबसूरत सा प्यार देना।
न ही कामना है मुक्त होने की, दास बनाके तेरे पास मुझे रख लेना।
तेरी महफिल सजे चारों ओर, दिल से अंतहीन गीतों का सैलाब निकले।
मेरी नजरों में छवि हो तेरी, ओर दिल मैं मोहब्बतसे भरा गीत हो।
जीवन का क्या उसे तो गुजरना है, तेरे अनंत प्यार भरी राह में।


- डॉ.संतोष सिंह