VIEW HYMN

Hymn No. 2998 | Date: 07-Aug-2005
Text Size
कैसे कहूँ न, जो प्यार है तुझसे, जहां भी जाऊँ तू ही याद आये।
कैसे कहूँ न, जो प्यार है तुझसे, जहां भी जाऊँ तू ही याद आये।
भुला बहुत बार हर बार तू याद आया, मन लगाना चाहा लगा न दिल।
तेरे पीछे पीछे दौड़ा दौड़ा जाये, तन मैं रहके तन का रह न पाये, खुद को तेरे पीछे पीछे दौड़ता पाऊँ।
सीखने में कुछ कमी न थी दुनिया की, करने मैं कुछ भी न था।
हर बार मन को ऊबते पाया, दिल को तेरे ख्यालों मे डूबते पाया।
सवाल कैसे करुँ तुझसे, जो सवालों का जवाब दिल मैं पहले से पाया।
नजर नजर का फेर है, जब जब दूर तुझसे समझा, उतना ही करीब आया।
मुक्कद्दर का खेल है या कर्मों का फेर, पर पल पल तुझे पास पाया।
जब जब लगा न दिया कुछ तूने मुझे, ऐसा कुछ न पाया जो न दिया हो तेरा।
तेरे होते मैं अलग हूँ तुझसे ऐसा बहुत चाहा, पर एक बार भी न तुझसे कह पाया।


- डॉ.संतोष सिंह