VIEW HYMN

Hymn No. 3001 | Date: 07-Aug-2005
Text Size
उमड़ घुमड़े बूंद बनके बरसे, जो दिल मैं समाया है तेरा प्यार।
उमड़ घुमड़े बूंद बनके बरसे, जो दिल मैं समाया है तेरा प्यार।
रह रहके मजबूर हूँ खो जाने को, तेरी यादों मैं ढूंढते ढूंढते तुझको।
चल चला है सिलसिला न जाने कब से, अंजाम को पाने के लिये तुझे।


- डॉ.संतोष सिंह