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Hymn No. 3002 | Date: 29-Aug-2005
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बिखर जाओगे, बिखर जाओगे, जब तक होश में आओगे तब तक बिखर जाओगे।
बिखर जाओगे, बिखर जाओगे, जब तक होश में आओगे तब तक बिखर जाओगे।

होंगे आंसू आँखो में तब, पर पोंछने वाले वख्त के हाथ न होंगे।

याद आयेगा वो सब, जो करते वख्त ख्याल न था, मन में पीड़ा ही पीड़ा होगी।

गुहार लगाओगे रब से बार बार, पर रुंधे गले से न निकलेगा स्वर।

फिर भी दोष ना दोगे खुद को दोष दोगे तुम हालातों को।

मन मसोस मसोस के रह जाओगे, समझ के समझ न पाओगे तब।

जो साथ है वे साथ छोड़ देंगे, देखते देखते आंखों से ओझल हो जाओगे।

पाया बहुत कुछ सारी जिंदगी में, तब सब कुछ खोने का अहसास रहेगा।

दास्ताँ है यह हर किसी की, कोई बिरला ही बचे जिसकी जिंदगी जुड़ी हो तुझसे।

पागल ये सिहर जाता है देख देखके दुनिया को, तब दिल जोर जोर से कहता है बिखरना नहीं है मेरी किस्मत में।


- डॉ.संतोष सिंह