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Hymn No. 3013 | Date: 28-Dec-2005
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कही अंतर में ओर गहरे, पुकारे धीरे धीरे प्रभु तेरा नाम तेरा नाम।
कही अंतर में ओर गहरे, पुकारे धीरे धीरे प्रभु तेरा नाम तेरा नाम।
लेता हूँ जब जब विराम दुनिया से, तो तुरंत याद दिलाये तेरा नाम तेरा नाम।
मसरुफ रहा तन के साये मैं, न जाने कब से दूर रहा, वख्त पे जो आयी तेरी याद।
एक बार को फिर से तेरी ओर दौड़ा, हृद्य की धड़कनो पे ताल मिलाते तेरी ओर चला।
यादों मैं बहते तेरे साथ, बिताये गये लम्हों को बदल दिया गीतों में।
सुर बनके गूंजे मन के कोने कोने में, न जाने कब कहां छा जाये प्यार भरी मस्ती।
क्या नाम दूं, न ही जानूँ अन्जाम को, पर छाने न देना विराम प्यार की मस्ती
हर हालातों से परे कायम रहे दिल मैं तेरा प्यार, न ही है अब कोई ओर दरकार।


- डॉ.संतोष सिंह