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Hymn No. 3030 | Date: 22-Feb-2006
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मरने से पहले तू मर जायेगा, अगर जो जीते जी प्रभु को ना पायेगा।
मरने से पहले तू मर जायेगा, अगर जो जीते जी प्रभु को ना पायेगा।
मरके भी न मर पायेगा, अगर जीते जी जो न प्रभु को पायेगा।
जब खुद को खोना होता है, तब प्रभु को पाना होता है।
ये कूंद ऐसा है ख्वाबों के लिये, तो सोना पड़ता है।
गुजरती जिंदगी गुजर जायेगी, गुजरने से पहले जो प्रभु को ना पायेगा।
वख्त के हाथों खुद को, जन्मों की कोठरी मैं बंद पायेगा।
खेल खेलती है वो सबके संग, कोई बिरला ही जीते खेलके उससे।
जो जीता वो हुआ त्रिकाल, हारे हुये का मत पूछो तुम यारों हाल।
जन्नत नसीब हो जाता है, धनभाग भी कई बार हम बन जाते है।
पर सबसे बड़ी जो बात है, श्वासों के छूटने से पहले हो जाये जो हम उसके।


- डॉ.संतोष सिंह