VIEW HYMN

Hymn No. 305 | Date: 25-Aug-1998
Text Size
क्या बताना चाहता है तू मुझे, वो तू जाने मैं तो बस तूझे अपना बनाना चाहूँ ।
क्या बताना चाहता है तू मुझे, वो तू जाने मैं तो बस तूझे अपना बनाना चाहूँ ।
जमाना मेरे बारे में क्या है सोचता, वो तो वे जाने हम तो दिन – रात तेरी यादों में डूबना चाहें ।
अच्छा क्या, बुरा क्या मुझे ना है पता, जो तू चाहे वहीं है मेरे लिये सर्वोपरि ।
किससे क्या कहना, क्या न कहना, ना है कूछ मुझे पता, जो तू कहलायेगा वो कह दूंगा ।
कौन है मेरे साथ, कौन नहीं क्याँ फर्क है पड़ता, मुझे तो बस तेरा साथ चाहिये ।
कौन आया, कौन गया, मेरा ह्रदय तो है निष्ठुर बड़ा, तेरे पास आना जान ही सब कुछ है मेरे लिये।
क्या जतन करूँ, कीसका पतन हुआ, ना कोई मेरा वास्ता मैं तो यूँ ही तेरा नाम लेना चाहूँ ।
तू मिले या ना मिले क्यों करूँ विचार, जब इस दिल को है अहसास तेरे साथ होने का।
कौन भला, कौन बुरा मेरे लिये तो सब के सब खरे, जो अपने तरीके से करें तेरा गुणगान ।
ना शर्म हो, ना ही छुपना – छुपाना, ना ही दिखाना, बस तेरे हवालें कर देना है।


- डॉ.संतोष सिंह