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Hymn No. 307 | Date: 26-Aug-1998
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ओ काका कभी तूम आते हो कभी चले जाते हो;
ओ काका कभी तूम आते हो कभी चले जाते हो;
दुनिया में रहके भाँति – भाँति के खेल – खेलते हो।
क्षुद्र है हम जो बुध्दि से कुछ जानना चाहते है तुझसे;
जान कर क्या करेंगे हम, विश्वास के संग गोता लगाना चाहते है तुझमें ।
रहे तेरा मेरा संग सूरज और सूरज की किरण की तरह;
तू है जल अथाह, हम सब गागर की बूंदे ।
हमें कुछ ना चाहिये, बस तुझे पुकारने की कृपा चाहें हम ;
हम तो खुश रहना चाहे तुझमें, बाकी तेरी मर्जी ।
मिटने वाली वस्तुओं के अलावा तूझे क्या दे सकते है हम;
और एक तू है जो अपना अहेतूक अमिट आनंद देता है हमें ।


- डॉ.संतोष सिंह