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Hymn No. 33 | Date: 03-Sep-1996
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हर तरफ फैला है उजियारा, क्यों मन में छाया है अंधियारा,
हर तरफ फैला है उजियारा, क्यों मन में छाया है अंधियारा,
प्रभु क्या तेरा मेरा संग गया है टूट, अचानक क्या ऐसा हो गया,
की मन घिर गया निराशा से, मन में अविश्वास का तूफान क्यों,
ऐसी लाचारी-बेवजह क्यों, इतनी चिंता क्षोभ किस बात पे
या क्यों मैं रो रहा हूँ, किसका मरण है आज
मेरी कलम से क्यों, स्याही की जगह आँसू टपके ।
क्या तनहा हूँ तेरे लिये, या मेरी तनहाई के लिये ।
प्रीत मेरी तुझसे है या तेरी बनायी चीजो के लिये
बीत जाने का डर ना है मुझे, पर तुझसे जुदा होने का डर है जरूर
दीपक को जलने के लिये बाती और तेल चाहिये ।
छूटेगा अँधियारा तब – जब गुरू का हाथ माथे पे होगा ।
- डॉ.संतोष सिंह
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