VIEW HYMN

Hymn No. 362 | Date: 16-Sep-1998
Text Size
यत्न, प्रयत्न हर बार करूंगा, इस ह्रदय के हर कोनें को सीचुंगा तेरे नाम से।
यत्न, प्रयत्न हर बार करूंगा, इस ह्रदय के हर कोनें को सीचुंगा तेरे नाम से।
गीरनें से रोकना मेरे वश में नहीं खुदको, लडखडातें कदम हर पल तेरी और बढेंगे।
मीटनें से रोकना ना है हाथों में मेरे, परवाह ना है तन की मन को साथ लें तेरी ओर बढे तो
बढने से तू रहा, अब तो घटना ही घटना है, आज नहीं तो कल मिटेंगी तेरे मेंरे बीच की दूरी
कोई जरूरी नहीं कुछ ओंर जीवन में होना, जो होना था वो हो चुका है अब बस नाम देंना है ना बाकी।
लडाई मेरी कीसी और से नहीं है लडता हूँ अपने आप से तेरी ओर बडने के लिये ।
अगन तो लग चुकी है प्यार की तेरी दिल में मेरे, खाक तो होना पड़ेगा प्यार में तेरे ।
इबादत कैसें करूं जो प्यार मुझको हो गया तुझसे, सच मैं इसके सिवाय कूछ ना सुझता है मुझको।
करनें कूछ चलता हूं कर देता हूँ कूछ ओंर, तेरे प्यार के चक्कर में ना रहता है होश मुझे
यें कोई कोरी बात ना करता हूँ मैं तुझसे होनी जो हो ही है मेरे साथ वो क्या कर रहा हूँ ।


- डॉ.संतोष सिंह