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Hymn No. 361 | Date: 16-Sep-1998
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शौक रहे हमें बस तेरा, तुझसे शुरू होके तूझ तक सीमित रहे हमारी दुनिया ।
शौक रहे हमें बस तेरा, तुझसे शुरू होके तूझ तक सीमित रहे हमारी दुनिया ।
मेरी हर कल्पना का जन्म हो तुझसे, उसका अंत तो भी तो तुझमें ।
मेरी हर इच्छाओsं का केंद्रबिंदू तू है, तेरी माया से है जनमी अर्पित करता हूँ तूझे ।
कीसी भी लोक में रहूँ जो तू चाहें वही करूं, भूलू में खुदको ना भुलु तुझको ।
मेरे इरादों को बल मिलता है तेरी शरण में रहके, जो तू चाहें वहीं करना है प्रथम ।
मौत और जीवन के इस पचड़े से ना हूँ डरता मैं, बस तेरा अहसास रहे सदा।
सुख हो या दुख जीवन का हर पल बीत जाता है, पर मेरा विश्वास कायम रहे सदा तुझमें ।
- डॉ.संतोष सिंह
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प्रभु नाम रस पीना तू सीख जा, जीना सीख जायेगा मुस्कूरा के हर पल को।
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