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Hymn No. 372 | Date: 22-Sep-1998
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बुला लें तू हमें पास अपने, कर्मों के इस संसार का मोह ना है करना ।
बुला लें तू हमें पास अपने, कर्मों के इस संसार का मोह ना है करना ।
आश्रित है हम तेरे सदियों से, तेरे सिवाय ना कोई दूजा है आश्रय ।
भाग्य में बहुत कुछ मिलनें को बदा है पर तू ना मिला ता मुझसे ज्यादा भाग्यहीन ना कोई।
दिल में तेरे जगह बना ना सकें ता कम से कम तेरे चरणों में मिलें ।
लज्जा आती है हमें जब मन होता है तुझसे दूर, पल – पल तोहें करीब चाहते है अपने ।
सपनों में तूझे लाख देखा है, अब इसे हकीकत में बदलना है चाहते।
तू सब कुछ हें जानता, फिर इतना अंजान क्यों है बनता ।
याचक बनकें याचना करूं तेरी बस इतनी सी दया है चाहते ।
हाथ जोडके रूंधे गले से तूझे पुकारता फिरूं यूं ही बिन भूलें ।
ना आश रखूं तुझसे ना हि निराश रहूँ दिल में बस तेरा ही भाव रहे ।


- डॉ.संतोष सिंह