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Hymn No. 390 | Date: 30-Sep-1998
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निकल रहे है हम यात्रा पे तो, आधी अधुरी तैयारी से ना काम चलेंगा।
निकल रहे है हम यात्रा पे तो, आधी अधुरी तैयारी से ना काम चलेंगा।

सद्गुरू की रजामंदी लेकें राह चूनना पड़ेगा, कहाँ से कहाँ है पहुचंना हमें।

मनकें हर कर्म को उसके चरणों मैं सौंपकें निश्चित हो जाना है ।

हर पल दिल में उसकी छवी को निहारना होगा, राह में मन ना लगाना ।

एक – एक क्षण गुजरनें पे आभार प्रकट तू करना उसका, हमें चलनें की ताकत दी है।

जो भी दौर आयेंगा, राह में गुजर जायेगा पर उसका साथ तू ना छोडना।

कई - कई तरह के लोग मिलेंगे, हरेंक से अपनापन से मिलना ।

तन पे आयेंगे कई खराश, मन में कोई खराश न आनें देना ।

दिल ही दिल उससे बतियाते रहना तू, ना होके भी होगा हर पल साथ वो ।

मोह वश तू ना रूकना, उसका साथ मिला हें तू चूपचाप चलना ।


- डॉ.संतोष सिंह