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Hymn No. 389 | Date: 29-Sep-1998
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संसार में तू ही तो है इक् हीरो बाकी तो सब है जीरो;
संसार में तू ही तो है इक् हीरो बाकी तो सब है जीरो;
सहारा कीसी का रहे या ना रहे, तेरा सहारा है तो सब कूछ है ।
आजमाया सबको कीसीका साथ न पाया, तेरा साथ छूटा ना कभी,
यहाँ – वहॉं जानं से अच्छा है, तुझसे प्यार करकें तेरे हाथों लूट जाना ।
जब चाहत में जनम लें लिया तो छोटी – मोटी वस्तुओं का खाँब क्यों देखना,
गुजरतें हुये देखां है, सबको बीस – पचास – सौ बरसो में कूछ ना ठहरतें देखा।
जो पहचानां ना उसे समय रहतें, बाद में हाथ भले न से क्या फायदा ।
दुनिया में उसकें सीवाय कीसीको साथ निभाते ना देखा, निभाया तो कूछ पलों के लिये,
उसका साथ इक् बार को जो पाया, फिर कीसी का साथ रास न आया।


- डॉ.संतोष सिंह