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Hymn No. 388 | Date: 29-Sep-1998
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बंद आंख हो या खुली आंख, जेहंज में हो बस तसवीर तेरी,
बंद आंख हो या खुली आंख, जेहंज में हो बस तसवीर तेरी,
दुनिया भरका काम कर लिया, जब तेरा नाम न लें पाया तो व्यर्थ है जीवन ।
कमानें को तो सब कमातें है, नजदीक का फायदा लेकें दूर कहीं है सहतें है घाटा ।
कर्मों से कई पुण्य कीयें होगे, पर मन ने तुझमें गोता न लगाया तो व्यर्थ है हर कर्म ।
रोजमर्रा के दिनचर्या के संग तूझे जोड न पायें तो गाहें – बगाहें याद करना है बेकार।
दिल ही दिल में तेरा नाम लेनें का आनंद है कुछ और, बाहर की खुशियाँ है क्षणमात्र।
हर इच्छा को त्याग कें, अपने आपको सहारे छोड दूंगा तेरे टूट जायेगा हर बंधन।
प्यार ही प्यार हो जाये तुझसे, प्यार में तू रूलायेंगा हमें बहुत मजा आयेंगा।
तेरी हर सजा है जान ऐ भी है प्यारी दिल में आता है आनंद मुझे ।
कुछ भी ना है तेरे सिवाए, जिस दिन दिल से देख लेंगे तूझे तू ही तू होगा।
- डॉ.संतोष सिंह
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