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Hymn No. 387 | Date: 28-Sep-1998
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सब कुछ पाना इक् बात है, सद्गुरू के श्री चरणों में रहना अलग बात;
सब कुछ पाना इक् बात है, सद्गुरू के श्री चरणों में रहना अलग बात;
इच्छाओं की खांई और कर्मों के कुयें को पार कराना है उसके हाथों में।
बडा साधारण सा रहता है वो, लाखों करोडाsं जैसा दिखता है वो;
होता है सब कुछ बस में उसकें, फिर भी व्यवहारिक कर्म करता है वो।
सब कूछ करतें हुये प्रभु के संग जीना सीखाता है वो;
दिल में उसकें प्रभु है बसतें, हर कष्टों का सामान हंस के करना है सीखाता।
दया का अथाह सागर है करूणामय रूप है उसका,
हर भूल को सुधारें, शरण आयें हुये का रक्षा करता सदा।
इस प्रार्थीव जग में साक्षात परम् पिता है वो,
जो उसकी सेवा में लगा, उसका फिर क्या है बनना बिगडना।


- डॉ.संतोष सिंह