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Hymn No. 405 | Date: 07-Oct-1998
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प्रभु तू क्या – क्या ना है करता, हमारें लिये दिलों की हर बात करता है पूरी ।
प्रभु तू क्या – क्या ना है करता, हमारें लिये दिलों की हर बात करता है पूरी ।
हम समझते है हमारा हर काम है जरूरी, तूझे प्रणाम करनें का भी ख्याल ना है कूरतें ।
फिर भी तू ना है रखता गिला – शिकवा कीसी से पुंजे तूझे या तोड़े तेरे घर को।
मगन रहता है अपने आप में सब कूछ देखते जानतें हुये ।
आपनें आप पे सहता है हर जुल्म, हमारे पुकारने पे दौडा चला आता है तू ।
ना ही कोई तेरा अपना, ना ही पराया, तू तो सबको है अपना समझता।
हर दामन साथ छोडा देता है कभी ना कभी, पर तेरा दामन जिसने पकडा उसका साथ सदा निभाया तूने।
कीतनी अकड है हममें कूछ ना होके, तू अनंत जगत का मालीक फिर भी ना अकडता।
प्रभु सिर्फ तेरी भक्ति दें, बिछुड जाये हम इस तन से ना बिछुड़े तुझसे।
मिंटु एक बार नहीं हजारों हजार बार, जीवन का हर पल गुजरें गीत गाते हुये तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह