VIEW HYMN

Hymn No. 410 | Date: 09-Oct-1998
Text Size
बढतें रहे बतायें तेरे रास्तें पे, डगमगातें कदम भी सम्भल जायेगे ।
बढतें रहे बतायें तेरे रास्तें पे, डगमगातें कदम भी सम्भल जायेगे ।

तू ही तू रहे हमारें दिल में हर पल, हर शक – सुबह मिट जायेगा अपने आप।

बात कोई भी हो शुरूआत करें तुझसे मध्य और अंत में बस तू ही तू रहे ।

दिल में हमारें तेरे प्रति प्यार की प्यार हो, उस प्यार के सैलाब में बह जायेगे हर गम और खुशी।

सुख और दुख जीवन कें है दो पहलु, इक् बार जो नाता जुड गया तुझसे कूछ ना है मानेंगे।

आहत हुआ और किया हूँ लोंगा की, राहत पाता हूँ तेरे पास आकें, दिल को अब कुद ना है सुहाता, जब तेरी यादों में गुम हो जातें है।

बात कोई भी हो अब जुड जाती है तुझसे, तेरे सिवाय चैंन नहीं पाता हूँ ।

जानां रहता है कहीं ओर, तेरी ओर कदम खुद ब खुद खीचें ले जाता है।

सच है तरसतें हुये दिल को अब कुछ रास नहीं आता, तेरे सिवाय।


- डॉ.संतोष सिंह