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Hymn No. 411 | Date: 10-Oct-1998
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हमारें कहनें से पहलें तू कर दिखाता है, जो आज हम जानतें है वो पहले से तू है जानता।
हमारें कहनें से पहलें तू कर दिखाता है, जो आज हम जानतें है वो पहले से तू है जानता।

असहज से हो जातें है जानकें हम उसे, तू जानता है सब कूछ फिर भी सहज रहता है ।

हम तूझे मानतें है बहुत, फिर भी क्यों नहीं है पहचान पातें ।

तू हम सबसे मिलनें के पहलें ही जान लेता है हमारें दिलों का हाल ।

सरल और तू है बन जाता, लेकें तूझें हमारा मन दुविधा में है पड़ जाता।

हमारें हर दूविधा को दूर करकें, विश्वास से परिपूर्ण तू ही बनाता।

जहाँ हमारीं सोच पहुंच ना है पाती, वों सब कूछ तू कर दिखाता है।

जिसे हम चमत्कार है समझते वो तो आस्था को इक् तरंग है ।

जिसे करनें में हमारीं अकल और जानी हुयी ताकत ना है कर पाती।

उसे तेरा प्यार कर दिखाता है बिन् कीसी उलझन के।


- डॉ.संतोष सिंह