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Hymn No. 526 | Date: 28-Dec-1998
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सीखा दें तू हमें जलना दीप के भाती, खुद रोशन होके रोशन करू जहाँ को ।
सीखा दें तू हमें जलना दीप के भाती, खुद रोशन होके रोशन करू जहाँ को ।
बाती हो प्रीत की उसमें, ज्ञान की स्निग्धता में डूबा रहे वो सदा ।
अपना – पराया का भेंद भूलाकें, मदद के ख्यालों से इन रोशन होता रहूँ हर पल ।
आयें बड़े – बड़े आंधीयाँ –तूफाँ, अक्षुण्णता बनायें रखना तू मेरी, रोशन करेंगे तेरी दया से।
मान-सन्मान ना दें कोई हमें, हम तो रोशनी में उसकें भीतर तेरा चेहरा देखा करेंगे।
गमीं हो या खुशीं का हर दोरे आकें गुजर जायेगा, हम एकसा जलतें रहेगे।
जलनें पे भी घायल ना होनें देना प्रभु हमारें दिल को, प्रेम की कीरनें बीखारायेंगे चारों ओर।
रहे ना कीसी एक विशेष से लगाव, तेरे चरणों में fिटमटिमातें रहे हम।
प्यार करें तुझसे इतना, कहीं भीतर से झंकार हो, रोशन दुनिया में तेरा चेहरा गुलजार हो।
क्याँ क्याँ करू मैं तुझसे अपने प्यार की, तू जानता है सब कूछ हम तेरा दीदार चाहते है हर क्षण।
- डॉ.संतोष सिंह
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मेरा आवाज तू है, मेरा सूर तू है, तेरे सिवाय कौन है मेरा।
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