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Hymn No. 527 | Date: 29-Dec-1998
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लूटा दूँ तूझपे सर्वस्व अपना, जो कुछ पाया है तुझसे ।
लूटा दूँ तूझपे सर्वस्व अपना, जो कुछ पाया है तुझसे ।
पागल कहता है कोई, रत्ती भर फिकर नहीं इस मतवाले को ।
जतन करकें क्या करूंगा, मैं नही तो वो साथ छोड जायेगा।
वक्त के आगे कीसी की ना चली, पायें हुये को खोना जरूर है।
बदलनें को बदलता है स्वरूप सबका, निरंतरता बनी रहती है ।
मुझे कुछ ना है जानना, बौरायें हुये फिरू खाँबो ख्यालों में ।
तेरे करीब होनें की मस्ती में डूबा रहे हर पल दिल मेरा।
होशों – हवाश ना रहे मुझको अपना, मैं जागतें सपनें देखता रहूँ तेरा।
अगर यें सब मेरी गलतफहमी है, मेरे लिये ना तोड़ना तू इसे।
मुझे छोड देना मेरे हाल पे, हम खुश रहेगे ख्यालों में पाकें तूझे।
- डॉ.संतोष सिंह
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सीखा दें तू हमें जलना दीप के भाती, खुद रोशन होके रोशन करू जहाँ को ।
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कसकें चिपट जाना चाहता हूँ तेरी बाहो में छुडा ना सकें कोई मुझे ।
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