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Hymn No. 533 | Date: 30-Dec-1998
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तस्वीर तैर रहीं है तेरी आखें में मेरे, छबी उभर रहीं है दिल में ।
तस्वीर तैर रहीं है तेरी आखें में मेरे, छबी उभर रहीं है दिल में ।
सताता है मन को बहुत तू, पर मुजा भी बहुत आता है मुझे ।
सुनानें को बहुत कुछ रखा है, पर आँखों से कह जाता हूँ तुझसे ।
दिल में गुनगुनाता है तू, शब्द बनकें उभर जाते है कोरे कागद पे ।
हर वो बात याद आती है तेरी, जब बैचेन रहता है दिल मेरा तेरे लिये ।
सलामत मुझे ना रहना है, हम तो लुट चुके है तूणपे दिल के हाथों ।
हर जुनुन का दौर आकें गुजर जाता है, तेरा जुनुन जो छाया मुझपे ।
फनाँह ना हो जायेगे जब तक तूझपे, तब तक चैंन नहीं आयेगा।
माफ करना तू हमें इबादत करना चाहते हुये हम तेरी इबादत कर नहीं पातें ।
मन मेरा मानता नहीं, हर बार दिल के हाथों मजबूर होके तुझसे प्यार कर बैठता।
ख्वाहीश कोई बची नहीं है, अब मैं मेरा मिट चुका है तुझमें ।
प्यार की बूँद समा चुकी है प्यार के महासागर में, प्यार कीसे कीससे करना ।


- डॉ.संतोष सिंह